कृषक वृक्ष क्रय/विक्रय योजना के नियम एवं शर्तें

1: यह योजना एवं सुविधा कृषकों की निजी भूमि पर उगाये गये वृक्षों का विक्रय उत्‍तर प्रदेश वन निगम के माध्‍यम से कराये जाने से सम्‍बन्धित है।

2: वृक्ष की गोलाई की माप जमीन से 1.37 मीटर की ऊॅचाई पर की जायेगी।

3: सूखे वृक्षों के लिये दरें अनुमानित दरों का 75 प्रतिशत होगी।

4: वेबसाइट/एप के माध्यम से जानकारी केवल साल] शीशम] सागौन] खैर] आम तथा यूकेलिप्टस प्रजातियों की हो सकेगी। शेष प्रजातियों का मूल्य विक्रय प्रक्रिया के पश्चात् वास्तविक रूप से कृषक को उसकी सहमति के आधार पर हो सकेगा (अर्थात शेष प्रजातियों का अनुमानित मूल्य प्रदर्शित नही किया जायेगा)। कृषक को वृक्षों के विक्रय हेतु 04 विकल्प होंगे। पहला - कृषक अपने खड़े वृक्षों को वन निगम द्वारा संचालित नीलाम प्रक्रिया द्वारा विक्रय करा सकते है। दूसरा - कृषक अपने खड़े वृक्षों का स्वंय द्वारा उत्पादित प्रकाष्ठ को वन निगम के स्थानीय डिपो पर प्राप्त करा वन निगम द्वारा संचालित नीलाम प्रक्रिया द्वारा विक्रय करा सकते हैं। तीसरा - कृषक अपने खड़ें वृक्षों को वन निगम के माध्यम से कटान ढ़ुलान डिपो पर करवा सकता है। इस दशा में कटान] ढ़ुलान एवं स्टैकिंग का व्यय कृषक द्वारा वन निगम की निर्धारित दरों पर वहन करना होगा। तत्पश्चात् डिपो में प्राप्त प्रकाष्ठ का नीलाम किया जायेगा। चैथा - निजी भूमि पर रोपित विभिन्न प्रजातियों (केवल आम] खैर] शीशम] साल] सागौन) के वृक्षों के कटे गोल प्रकाष्ठ की मात्रा (डिपो प्राप्ति के आधार पर ग्रेडिग के पश्चात्) के अनुसार भुगतान कृषक को किया जायेगा। उपरोक्त प्रथम तीन विकल्पों के अंतर्गत कार्यवाही करने के पश्चात् नीलाम में प्राप्त मूल्य में वन निगम का 12-5 प्रतिशत उपरिव्यय काटकर धनराशि कृषक को तत्काल भुगतान कर दी जायेगी। चैथे विकल्प के अन्तर्गत कृषक को भुगतान किये जाने की धनराशि में से यह उपरिव्यय नही काटा जायेगा। वन विभाग से वृक्षों की पातन अनुज्ञा एवं अभिवहन अनुज्ञा कृषक को प्राप्त करनी होगी। इसके लिये वन विभाग को कृषको के आवेदन जो कि प्रस्तावित मोबाईल एप के माध्यम से प्राप्त होंगे] उन्हें सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी को कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जायेगा ताकि उन आवेदन पत्रों का निस्तारण ससमय हो सके।

5: अनुमानित मूल्‍य निर्धारण कृषकों द्वारा निजी भूमि में उगाये गये वृक्षों को विक्रय किये जाने हेतु किया गया है। प्रतिबन्धित प्रजातियों को काटने से पूर्व वृक्ष मालिक के द्वारा उत्‍तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत सम्‍बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी से वृक्षों को काटने तथा अभिवहन हेतु अनुज्ञा प्राप्‍त करनी होगी।

6: कृषि वानिकी के अन्‍तर्गत सुनिश्चित दरों को प्रति वर्ष वन निगम भारित औसत विक्रय की दरों में की गयी वृद्धि या कमी होने पर आवश्‍यकतानुसार परिवर्तन करेगा।

7: करों का दायित्‍व वन निगम द्वारा वहन नहीं किया जायेगा।

8: समस्‍त देय कर वृक्षों के क्रेता द्वारा वहन किये जायेगें। जिसकी वसूली वृक्षों के विक्रय मूल्‍य के आधार पर वन निगम द्वारा नियमानुसार की जायेगी और सम्‍बन्धित प्राधिकृत कर अधिकारी के खाते में जमा की जायेगी।

9: कृषकों को इस योजना का लाभ उठाने हेतु सर्वप्रथम उत्‍तर प्रदेश वन निगम की वेबसाईट/ मोबाईल एैप के द्वारा पंजीकरण कराना होगा।

10: आनलाईन निर्धारित फार्म में मॉगी गई सूचनाओं के भरे जाने के उपरान्‍त ही अग्रेतर कार्यवाही की जायेगी। उत्‍तर प्रदेश वन निगम के समीपस्‍थ कार्यालय में सम्‍पर्क करके भी सूचनायें दर्ज करायी जा सकती हैं।

11: कृषकों को पंजीकरण कराते समय, आधार कार्ड की छायाप्रति/ भूमि एवं वृक्षों के अधिपत्‍य से सम्‍बन्धित प्रमाण पत्र/ वृक्षों की प्रजातियों एवं जमीन से 1.37 मीटर ऊपर ऊॅचाई पर पेड़ों की गोलाई से सम्‍बन्धित विवरण भी उपलब्‍ध कराना होगा। अत: समस्‍त जानकारी पंजीकरण कराने से पूर्व अपने पास रखें।

12: कृषक द्वारा वन निगम के द्वारा अनुमानित विक्रय मूल्‍य से सहमत होने के उपरान्‍त सम्‍बन्धित/ संसूचित वन निगम के कार्यालय में जमानत स्‍वरूप रूपया 10/- प्रति वृक्ष के रूप में जमानत जमा करके चालान प्राप्‍त करना होगा। तद्पश्‍चात् वन निगम द्वारा अनुबन्‍ध पत्र पर हस्‍ताक्षर होने के उपरान्‍त सार्वजनिक नीलाम की कार्यवाही आरम्‍भ की जायेगी।

13: नीलाम से सम्‍बन्धित तिथि/ कार्यवाही की रिपोर्ट सम्‍बन्धित कृषक को पूर्व में उपलब्‍ध करा दी जायेगी।

14: कृषकों के वृक्षों के नीलाम से पूर्व वन निगम द्वारा अपनी वेबसाईट/ पंजीकृत क्रेताओं को नीलाम का प्रचार प्रसार करते हुये नीलाम की सूचना प्रकाशित करायी जायेगी। नीलाम की तिथि पर कृषक के समक्ष नीलाम सम्‍पन्‍न किया जायेगा।

15: नीलाम में प्राप्‍त उच्‍चतम मूल्‍य पर कृषक के सहमत होने पर ही नीलाम का अनुमोदन किया जायेगा। वृक्ष क्रय करने वाले क्रेता से वन निगम के कार्यालय द्वारा मौके पर ही 10 प्रतिशत जमानत तद्नुसार GST धनराशि जमा करने को कहा जायेगा। जमानत नहीं जमा होने पर क्रेता को की गयी नीलामी को स्‍वत: निरस्‍त मानते हुये उसका प्रवेश शुल्‍क (गेट मनी) रू0 दस हजार को वन निगम के पक्ष में जब्‍त कर लिया जायेगा एवं काली सूची में दर्ज करने की कार्यवाही प्रस्‍तावित की जायेगी। जमानत जमा होने के उपरान्‍त क्रेता द्वारा इस विक्रय के अनुमोदन के दस दिन के अन्‍दर शेष 90 प्रतिशत धनराशि एवं कर जमा करने के उपरान्‍त, सूचना कृषक को दे दी जायेगी और कृषक के वृक्षों के कटान हेतु वन निगम द्वारा कार्यादेश निर्गत कर दिया जायेगा। कार्यादेश जारी होने के उपरान्‍त 25 दिन के अन्‍दर क्रेताओं को कटान एवं ढुलान करना आवश्‍यक होगा। यह समस्‍त कार्यवाही अनुबन्‍ध होने के पश्‍चात् 60 दिन के अन्‍दर पूर्ण कर ली जायेगी।

16: कृषक के वृक्षों में न्‍यूनतम 91.00 सेमी0 से ऊपर की गोलाई के न्‍यूनतम 10 वृक्ष / न्यून्तम अनुमानित 05 घ0मी0 से अधिक गोल प्रकाष्ठ उत्पादन योग्य वृक्ष होने पर ही वन निगम द्वारा वृक्ष नीलाम/विक्रय किये जा सकते है।

17: क्रेता से सम्‍बन्धित अनुबन्‍ध की शर्ते अलग से तय होंगी और सम्‍बन्धित कार्यालय में उपलब्‍ध होगी।

18: भूमि से सम्‍बन्धित अथवा वृक्षों के मालिकाने से सम्‍बन्धित किसी भी विवाद की जिम्‍मेदारी सम्‍बन्धित कृषक की होगी और विवाद की दशा में उत्‍तर प्रदेश वन निगम पक्षकार नहीं होगा।

19: शर्तों के अनुपालन किसी अनहोनी घटना एवं विवाद होने पर उत्‍तर प्रदेश वन निगम में सम्‍बन्धित क्षेत्रीय प्रबन्‍धक मध्‍यस्‍थ (आर्बीट्रेटर) होगें और उनका निर्णय अंतिम एवं समस्‍त पक्षों को मान्‍य होगा।

20: इस क्रय विक्रय से सम्‍बन्धित किसी भी विवाद के सम्‍बन्‍ध में न्‍यायिक वाद केवल विक्रय प्रभाग के जनपद न्‍यायालय में ही दायर किया जा सकता है।

21: प्रबन्‍ध निदेशक, उत्‍तर प्रदेश वन निगम को नियम व शर्तों में आवश्‍यकतानुसार सुधार के लिये पूर्ण अधिकार प्राप्‍त है। समय- समय पर प्रबन्‍ध निदेशक आवश्‍यकतानुसार नियम एवं शर्तों में परिवर्तन कर सकते हैं।

सहमत असहमत
अनुमानित मूल्य (रू.) निकाले
 
 
 
 
 
कृषक वृक्ष विक्रय योजना से सम्बन्धित कुछ प्रश्न-उत्तर विभिन्न जनपदों में वन निगम द्वारा स्थापित डिपो की सूची
आवेदन की प्रक्रिया